

रितिक वैष्णव की रिपोर्ट
अडानी पॉवर प्लांट पताढी में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्लांट परिसर में पॉवर मेट, रोहन बिल्डर्स, अरनी जैसी बड़ी कंपनियों के अलावा कई छोटी कंपनियां संचालित हो रही हैं। यहां हजारों मजदूर कार्यरत हैं, लेकिन गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मी अपनी जिम्मेदारियों को दरकिनार कर लापरवाही बरतते नज़र आ रहे हैं।स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, गेट पर सुरक्षाकर्मी मजदूरों का गेट पास और सेफ्टी उपकरण चेक करना जरूरी नहीं समझते। यहां तक कि कई मजदूर बिना सेफ्टी और बिना पास चेक के अंदर प्रवेश कर रहे हैं। वहीं, रोहन बिल्डर्स की ओर से मजदूरों का नाम मात्र कॉपी में दर्ज किया जा रहा है, जबकि गेट पास जांच जैसी अनिवार्य प्रक्रिया को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
अंतर्राज्यीय मजदूरों की भारी संख्या – मेडिकल और वेरिफिकेशन पर भी सवालसूत्रों के अनुसार, कंपनियों में लगभग 80% मजदूर बाहरी राज्यों से लाए गए हैं, जबकि स्थानीय मजदूरों की संख्या मात्र 20% है। आशंका जताई जा रही है कि इन मजदूरों का वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट तक नहीं कराया गया है। इससे सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ सकते हैं।स्थानीय बेरोजगारों में नाराजगीआसपास के ग्रामीण युवाओं का आरोप है कि कंपनियां उन्हें रोजगार देने की बजाय बाहरी लोगों को प्राथमिकता दे रही हैं। स्नातक और तकनीकी योग्यताधारी स्थानीय युवक-युवतियां बेरोजगारी झेल रहे हैं, जबकि कंपनियां बाहरी मजदूरों को काम पर रख रही हैं।
बड़ा सवाल – आखिर छूट किसकी मिली हुई है?इतनी भारी सुरक्षा तैनाती के बावजूद मजदूरों का बिना जांच के अंदर प्रवेश करना गंभीर सवाल खड़ा करता है। क्या यह सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही है या फिर किसी कंपनी की मिलीभगत? यह जांच का विषय है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसी ही लापरवाही जारी रही तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन और कंपनी प्रबंधन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं।