
रितिक वैष्णव की रिपोर्ट
हसदेव नदी के किनारे ग्राम पंचायत भैंसामुड़ा में रेत माफिया बेखौफ होकर अवैध खनन कर रहे हैं। आपको बता दे कि भैसामुड़ा रेत घाट में 21 तारीख से रॉयल्टी बंद कर दिया गया है जिसके बावजूद ग्राम के ही जनप्रतिनिधियों द्वारा ट्रैक्टर में लोड करवाया जाता है जिसमें लेबर चार्ज 400 रुपए एवं बिना रॉयल्टी लूज 200 लिया जा रहा है ट्रैक्टर ड्राइवर से बात करना पर उनका कहना है कि जब रॉयल्टी नहीं कट रही तो लूज लिया जा रहा है
वही सरपंच एवं उनके जनप्रतिनिधि द्वारा बताया गया कि ऐसा हमारे द्वारा नहीं लिया जा रहा है
आखिरकार ट्रेक्टर मालिक ड्राइवर झूठ बोल रहे है या जनप्रतिनिधि अपनी सफाई दे रहे है
रेत माफिया से सेटिंग का आरोप
ग्रामीणों की माने तो रेत माफिया का जिला खनिज अधिकारी कार्यालय में गजब की सेंटिग दिखाई पड़ती है. कलेक्टर के अवैध उत्खनन पर कार्रवाई करने का आदेश जारी करते ही रेत माफियाओं की इसकी जानकारी लग जाती है.तभी तो जब तक कार्रवाई करने के लिए खनिज अमला मौके पर पहुंचता है तो कोई भी गाड़ी नहीं दिखाई देती.
शासन को लाखों का नुकसान
रेत खदान से निकलने वाली गाड़ियों में क्षमता से अधिक ओवर लोड रेत भरी होती है. जिससे सड़कें खराब हो रही है. साथ ही इन ओवर लोड वाहनों से सरकार को दोहरे राजस्व की हानि उठानी पड़ रही है. एक तो रेत का अवैध उत्खनन और ऊपर से ओवर लोड गाड़ियों की वजह से सड़कों के खराब होने पर उनकी मरम्मत पर खर्च. लेकिन इन सबसे जिले के अधिकारियों को कोई सरोकार नहीं है
वहीं यह भी बताया जा रहा है कि भैंसामुडा में रेत का अवैध व्यापार कर मुनाफा कमाने वाले की संख्या बहुत ज्यादा है, यहां खनिज विभाग भी इन माफियाओं पर नकेल कसने में कामयाब नहीं हो पा रहा है. खनिज विभाग के अधिकारी के मुताबिक अवैध रेत उत्खनन की जानकारी मिलने के बाद तस्करों से जुर्माना वसूलने की कार्रवाई की जा रही है और उनके वाहनों को भी जब्त करने की कार्यवाही की जा रही है. लेकिन राजस्व विभाग केवल जुर्माना वसूली तक सीमित है
पुलिस थाना उरगा की कारगुजारी इन दिनों सुर्खियों में है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उरगा थाना क्षेत्र अंतर्गत अवैध रेत परिवहन का सिलसिला जोरों पर चल रहा है। रेत माफिया बेखौफ होकर चोरी की रेत बेधड़क बेच रहे हैं। इन दिनों तो रेत माफिया इतने सक्रिय हैं कि मानों पुलिस भी आँखे बंद किये हुए है। हाल तो यह है कि रेत माफियाओं के आगे पुलिस भी नतमस्तक नजर आ रही है। सूत्रों की माने तो पुलिसिया रुबाब का जरा सा भी खौफ रेत माफियाओं में नहीं है।
दरअसल इसके पीछे की मुख्य वजह पुलिस द्वारा माफियाओं को खुला संरक्षण देना भी माना जा रहा है। माना तो ऐसा भी जा रहा है कि अवैध रेत कारोबारीयों में इतना दम नहीं है कि वह बगैर पुलिस का संरक्षण प्राप्त किए बेधड़क बिना टीपी और रॉयल्टी के परिवहन कर सकें, किंतु उरगा थाना क्षेत्रांतर्गत ऐसा ही होता नजर आ रहा है।