
रितिक वैष्णव की रिपोर्ट
करतला ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत लिमडीह में अवैध रेत खनन का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। पंचायत ने गांव की भलाई के लिए यह प्रस्ताव पास किया था कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिन हितग्राहियों को मकान निर्माण के लिए रेत की ज़रूरत होगी, उन्हें प्राथमिकता से गांव की रेत दी जाएगी। लेकिन पंचायत के इस निर्णय को ताक पर रखकर ट्रैक्टर मालिक मनमानी पर उतर आए हैं। वे गांव की रेत निकालकर उसे आसपास के अन्य पंचायतों और बाहरी जगहों तक ले जाकर बांट रहे हैं।
पंचायत की स्पष्ट मंशा
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीबों और बेघरों को पक्का घर उपलब्ध कराना है। लिमडीह पंचायत ने भी इसी सोच के साथ फैसला लिया कि गांव के जरूरतमंद हितग्राहियों को समय पर रेत मिले, ताकि उनका घर का सपना अधूरा न रहे। पंचायत के सरपंच ने ग्राम सभा में साफ कहा था कि “गांव की रेत, सबसे पहले गांव के ही काम आएगी।”
ट्रैक्टर मालिकों का रवैया
पंचायत के निर्णय के बावजूद, ट्रैक्टर मालिक अपने निजी फायदे के लिए रेत का अवैध खनन कर रहे हैं। वे ट्रैक्टरों में रेत भरकर उसे पड़ोसी पंचायतों और बाहर के लोगों तक पहुँचा रहे हैं। इस वजह से कई गरीब परिवार, जिन्हें पीएम आवास के लिए रेत की ज़रूरत थी, परेशान हो रहे हैं।
ग्रामीणों का आक्रोश
गांव के अन्य ग्रामीण भी इस स्थिति से बेहद नाराज़ हैं। उनका कहना है कि पंचायत ने गरीबों के लिए जो योजना बनाई थी, उसे ट्रैक्टर मालिक अपनी मनमानी से बिगाड़ रहे हैं। इससे ग्राम सभा की गरिमा को ठेस पहुँच रही है।
पंचायत की सख्त चेतावनी
लिमडीह पंचायत ने इस मामले में साफ चेतावनी दी है। सरपंच का कहना है कि –
“गांव की रेत पर सबसे पहले हक़ गांव का ही है। पीएम आवास योजना के हितग्राहियों को प्राथमिकता दी जाएगी। ट्रैक्टर मालिक यदि अपनी मनमानी जारी रखते हैं, तो पंचायत उनके खिलाफ कार्रवाई करने पर मजबूर होगी।”
अवैध खनन से खतरे
रेत का अवैध खनन सिर्फ गरीबों के घर अधूरे नहीं छोड़ रहा, बल्कि इसका पर्यावरण पर भी दुष्प्रभाव पड़ रहा है। नालों और खेतों से रेत निकालने से जलस्तर गिर रहा है और खेती-किसानी पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर ट्रैक्टर मालिकों की मनमानी पर रोक नहीं लगी, तो आने वाले समय में गांव को गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा।
ग्राम पंचायत लिमडीह का प्रस्ताव गरीबों और गांव के हित में लिया गया था। लेकिन ट्रैक्टर मालिकों की मनमानी इस प्रस्ताव को कमजोर कर रही है। जिन गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिलना चाहिए था, वे आज भी रेत के अभाव में अधूरे मकानों में रहने को मजबूर हैं।
ग्रामीण अब पंचायत के साथ खड़े होकर इस लड़ाई को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि –
“गांव की रेत सिर्फ गांव के लिए है। बाहरी पंचायतों को रेत भेजना हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
साफ है कि लिमडीह पंचायत गरीबों के पक्ष में है, लेकिन ट्रैक्टर मालिकों की मनमानी ग्राम विकास की राह में बाधा बन रही है।


















