
चौहान/रिपोर्टर/कोरबा/ शुक्रवार की दोपहर करीब 2 बजे तब सामने आया जब एक स्थानीय किसान अपने खेत में काम कर रहा था। अचानक एक केले में कुछ हलचल दिखाई दी। पास ही देखने पर उसने देखा कि इसमें एक सितारा मौजूद है। उन्होंने संयुक्त वन विभाग को सूचित किया और बताया कि उनके खेत “पहाड़ चित्ती” में क्या है, तब वन रक्षक ने तत्काल उस स्थान पर पूरे देश में जानकारी दी और बताया कि यह किंग कोबरा किंग कोबरा (ओफियोफैगस हन्ना) है, जिसे ग्रामीण पर्वत चित्ती के नाम से भी जाना जाता है।
सूचना ही है कोरबा वनमंडल के सलाहकार श्री मयंक अग्रवाल एवं नोवा नेचर डेमोकेशियल सोसाइटी के विशेषज्ञ श्री शिखर सारथी, श्री मयंक बागची एवं श्री ग्रेडुवा मारुवा कोरबा से लेमारू रेंज में पूर्व डी एफओबी सर के मार्गदर्शन में पहले थैला के फ्रेम को जमा कर बिशप सारथी ने रेस्क्यु चालू किया था, उन्होंने वैज्ञानिक प्रक्रिया, फर्म और सुरक्षा के साथ किंग कोबरा को स्थापित किया और प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
इस अभियान में वन विभाग से श्री याज्ञवल्क्य राणा, श्री विकास बनर्जी , श्री रामेश्वर सीदार, वनपाल श्री श्रवण कुमार गायकी, वनरक्षक श्री जय कंवर,, श्री शिवनारायण बिंझवार एवं श्री शुखसागर सिंह की विशेष भूमिका रही।
घटनास्थल पर विधिवत पंचनामा तैयार कर स्थानीय ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण, कानूनी पहलुओं एवं मानवीय जिम्मेदारी के बारे में जागरूक किया गया। ग्रामीणों को यह भी समझाया गया कि किसी भी वन्यजीव की उपस्थिति पर घबराने की बजाय तत्काल वन विभाग को सूचित करें।
वनमंडलाधिकारी श्री मयंक अग्रवाल ने कहा, “किंग कोबरा जैसे संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण हमारी पर्यावरणीय प्रतिबद्धता का एक अहम हिस्सा है। ऐसे समन्वित रेस्क्यू अभियान समाज में जागरूकता और सहभागिता को भी बढ़ावा देते हैं।”
यह अभियान वन विभाग, नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी और स्थानीय समुदाय के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सशक्त और प्रेरणादायक कदम है।


















