कोरबा। जिले में कम समय में ज्यादा पैसा कमाने का लालच देकर लोगों से निवेश कराने का एक कथित मामला सामने आया है। ‘Mr. Mint’ नाम के ऐप या प्लेटफॉर्म के जरिए मोबाइल पर ID बनाकर निवेश कराने और हर महीने भारी रिटर्न देने का दावा किए जाने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि लोगों से कहा जाता है कि यदि वे ₹1 लाख निवेश करते हैं तो उन्हें हर महीने करीब ₹20 हजार तक देने का भरोसा दिलाया जाता है।ऐसे दावों ने अब कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर इतनी बड़ी रकम पर हर महीने 20 प्रतिशत के आसपास रिटर्न देने का मॉडल क्या है? इस पैसे का स्रोत क्या है और निवेश करने वाले लोगों को वास्तव में रकम किस तरह लौटाई जाती है? यदि यह कोई वैध निवेश योजना है तो इसकी नियामकीय मंजूरी और कंपनी की पूरी जानकारी क्या है? इन सवालों का जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं है।स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि मोबाइल पर ID बनाकर लोगों को इस कथित योजना से जोड़ने के लिए एजेंटों का नेटवर्क काम कर रहा था। आरोपों के मुताबिक रामेश्वर साहू, ब्रम्हा नाद ठाकुर सहित कुछ अन्य लोगों की एजेंट के रूप में भूमिका होने की चर्चा है। वहीं गोपाल भौमिकी, सूरज जैसवाल, कुलदीप यादव, नारायण चौहान और श्याम कुमार समेत कई नामों को कथित तौर पर इस नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है।हालांकि, इन सभी व्यक्तियों की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। यदि शिकायतें सही हैं, तो पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाना अहम होगा कि लोगों से रकम किस माध्यम से ली गई, पैसा किन खातों में पहुंचा, कितने लोगों को इस योजना में जोड़ा गया और अब तक कुल कितनी राशि का लेन-देन हुआ।सबसे बड़ा सवाल यह है कि ₹1 लाख के निवेश पर हर महीने ₹20 हजार देने का दावा आखिर किस आधार पर किया जा रहा था? आम लोगों को इतनी अधिक और नियमित कमाई का लालच देकर निवेश के लिए प्रेरित किया गया तो यह गंभीर वित्तीय जोखिम का मामला हो सकता है।कथित तौर पर आसान कमाई और जल्दी पैसा दोगुना-तिगुना होने जैसे दावों के कारण बड़ी संख्या में लोग आकर्षित हो सकते हैं। ऐसे मामलों में शुरुआत में कुछ लोगों को भुगतान मिलने के बाद अन्य लोगों का भरोसा बढ़ने और फिर उनसे बड़ी रकम निवेश कराने की आशंका रहती है। यदि किसी नेटवर्क ने इसी तरीके से लोगों से करोड़ों रुपये जुटाए हैं, तो पूरे मामले की वित्तीय जांच बेहद जरूरी हो जाती है।अब लोगों की नजर पुलिस और आर्थिक अपराध से जुड़ी जांच एजेंसियों पर है। शिकायत मिलने पर एजेंटों की भूमिका, बैंक खातों और UPI लेन-देन, मोबाइल नंबर, ऐप की तकनीकी जानकारी, निवेशकों की सूची और पैसों के अंतिम गंतव्य की जांच की जा सकती है।फिलहाल सबसे जरूरी सवाल यही है—‘Mr. Mint’ वास्तव में क्या है, इसके पीछे कौन लोग हैं और ₹1 लाख पर हर महीने ₹20 हजार देने का दावा किस आधार पर किया जा रहा था? यदि बड़े पैमाने पर लोगों से पैसा लिया गया है, तो पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
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