कोरबा जिले में निजी स्कूलों की कथित मनमानी और अभिभावकों पर महंगी किताबों का आर्थिक बोझ डालने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के प्राचार्यों की जांच टीम गठित की है। टीम ने दीपका क्षेत्र के निजी स्कूलों में पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।दीपका क्षेत्र के निजी सीबीएसई स्कूलों में एनसीईआरटी और मानक पुस्तकों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें अनिवार्य रूप से खरीदवाने के आरोपों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के जिलाध्यक्ष जैनेन्द्र कुर्रे ने जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए निजी स्कूलों की कथित मनमानी और अभिभावकों पर पड़ रहे अतिरिक्त आर्थिक बोझ की जांच की मांग की थी।शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के प्राचार्यों को जांच अधिकारी नियुक्त किया। जांच दल ने दीपका क्षेत्र के निजी स्कूलों से जुड़े मामलों की मौके पर पड़ताल शुरू कर दी है।जांच के दौरान जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के जिलाध्यक्ष जैनेन्द्र कुर्रे भी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने जांच अधिकारियों के सामने अभिभावकों की शिकायतों को रखा और कहा कि यदि निजी स्कूलों द्वारा नियमों का उल्लंघन कर महंगी किताबें थोपने या अन्य वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितता की पुष्टि होती है, तो दोषी स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।इस दौरान संगठन की ओर से यह भी मांग रखी गई कि स्कूलों में किताबों की अनिवार्य बिक्री पर रोक लगाई जाए और शासन एवं संबंधित बोर्ड के नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए।जांच प्रक्रिया के दौरान डॉ. महावीर यादव, जिला सचिव, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी तथा ओम केंवट, जिला संगठन मंत्री, छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।पार्टी ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने और अभिभावकों की शिकायतों का उचित निराकरण होने तक उनका विरोध जारी रहेगा। वहीं अब सबकी नजर शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट और निजी स्कूलों पर संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई है।जिलाध्यक्ष जैनेन्द्र कुर्रेअभिभावकों पर किसी भी तरह का अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। जांच में यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो दोषी स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”फिलहाल जांच शुरू हो चुकी है। अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट में क्या सामने आता है और शिक्षा विभाग निजी स्कूलों की कथित मनमानी पर क्या कार्रवाई करता है।
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