रायपुर। वनवासी विकास समिति, छत्तीसगढ़ द्वारा स्थापित “शबरी वाचनालय” का उद्घाटन शबरी कन्या आश्रम परिसर, रोहिणीपुरम में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पहल जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और बालिकाओं की शिक्षा को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है।कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष उमेश कच्छप ने की, जबकि अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के संगठन मंत्री अतुल जोग मुख्य वक्ता रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और वाचनालय उद्घाटन से हुई। छात्राओं ने स्वागत नृत्य तथा “राष्ट्र विजयी हो हमारा” गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया।मुख्य वक्ता अतुल जोग ने बताया कि वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना वर्ष 1952 में जशपुर से हुई थी और आज इसकी शिक्षा व समाज सेवा की पहल से अनेक छात्राएँ डॉक्टर, प्रोफेसर, तहसीलदार, पुलिस अधिकारी, सेना एवं महिला कमांडो के रूप में देश की सेवा कर रही हैं।राज्यपाल रमेन डेका ने अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय इतिहास, भाषा और लोक परंपराओं का संरक्षण समय की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रूप से PVTG (अत्यंत पिछड़ी जनजातियों) के संरक्षण, उनकी संस्कृति के संवर्धन तथा जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों और वीरांगनाओं, विशेषकर रानी दुर्गावती, के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने पर जोर दिया। उन्होंने नागरिकों से समाजहित में कम-से-कम एक रचनात्मक कार्य करने का भी आह्वान किया।कार्यक्रम के अंत में समिति के अध्यक्ष उमेश कच्छप ने सभी अतिथियों, कार्यकर्ताओं एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।
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