कोरबा। रजगामार क्षेत्र के केसला गांव में मंगलवार रात उस समय हड़कंप मच गया, जब करीब 10 फीट लंबा किंग कोबरा एक ग्रामीण के घर की बाड़ी में रखे खपरैल के बीच जाकर छिप गया। जिस स्थान पर सांप मौजूद था, वहां परिवार का देव स्थल भी था। विशालकाय किंग कोबरा को देखकर परिवार में दहशत फैल गई और देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।घटना की सूचना तत्काल वन विभाग के कमलेश कुम्हार और सूरज सिंदार को दी गई। इसके साथ ही नोवा नेचर रेस्क्यू टीम के प्रमुख जितेंद्र सारथी को भी जानकारी दी गई।उस समय गांव में बिजली नहीं होने के कारण अंधेरे में खपरैल के बीच छिपे किंग कोबरा का रेस्क्यू करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। थोड़ी सी भी लापरवाही रेस्क्यू टीम के लिए खतरा पैदा कर सकती थी।वनमंडलाधिकारी प्रेमलता यादव के निर्देश और उपवनमंडलाधिकारी रामसिंह राठिया के मार्गदर्शन में वन विभाग के कर्मचारियों तथा रेस्क्यू टीम के जितेंद्र सारथी और बॉबी श्रीवास ने सुरक्षा प्रक्रिया का पालन करते हुए टॉर्च की रोशनी में काफी मशक्कत की। आखिरकार किंग कोबरा को सुरक्षित बाहर निकालकर रेस्क्यू बैग में रखा गया।आवश्यक पंचनामा कार्रवाई के बाद किंग कोबरा को उसके प्राकृतिक रहवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।रजगामार के प्रभारी कमलेश कुम्हार ने ग्रामीणों से अपील की कि घर या आसपास कोई भी वन्यजीव दिखाई देने पर उसे मारने या पकड़ने की कोशिश न करें। तत्काल वन विभाग अथवा अधिकृत रेस्क्यू टीम को सूचना दें, ताकि वन्यजीव को सुरक्षित रेस्क्यू कर उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके।वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार किंग कोबरा पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे वन्यजीवों के आबादी क्षेत्र में पहुंचने पर उन्हें नुकसान पहुंचाने के बजाय विशेषज्ञों की मदद लेना ही सुरक्षित और जिम्मेदार कदम है।रेस्क्यू के दौरान केसला के सरपंच, वन विभाग के कर्मचारी और आसपास के बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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