कोरबा जिले की प्रमुख औद्योगिक इकाई बालको वेदांता एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला स्थानीय युवाओं और मजदूरों को रोजगार दिए जाने से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश के श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन द्वारा बालको वेदांता प्रबंधन से स्थानीय मजदूरों और कर्मचारियों की संख्या संबंधी जानकारी मांगी गई थी।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिस पत्र के आधार पर जानकारी मांगी गई, उसका विभागीय रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं बताया जा रहा है। ऐसे में कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि मंत्री द्वारा पत्र जारी किया गया था, तो उसका विधिवत संधारण क्यों नहीं हुआ? क्या रिकॉर्ड रखने में लापरवाही बरती गई या फिर मामला कुछ और है?
स्थानीय श्रमिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि बालको जैसी बड़ी औद्योगिक इकाई में स्थानीय लोगों को रोजगार देने का मुद्दा वर्षों से उठता रहा है। ऐसे में मंत्री स्तर से मांगी गई जानकारी और उस पर हुई कार्रवाई पूरी तरह सार्वजनिक होनी चाहिए।
वहीं विपक्षी दलों और जनप्रतिनिधियों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पत्र वास्तव में जारी हुआ था तो उसका रिकॉर्ड गायब होना गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े करता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि बालको वेदांता प्रबंधन ने इस पत्र का जवाब दिया था या नहीं।
फिलहाल श्रम विभाग और बालको प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में स्थानीय रोजगार और विभागीय पारदर्शिता से जुड़ा यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
उठ रहे प्रमुख सवाल
श्रम मंत्री द्वारा भेजे गए पत्र का विभागीय रिकॉर्ड कहां है?
क्या बालको प्रबंधन ने पत्र का जवाब दिया था?
यदि जवाब मिला था, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
क्या रिकॉर्ड संधारण में गंभीर लापरवाही हुई है?
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कब होगी?














