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    Home»Blog»शिवा साहू केस में न्याय के लिए शिकायतकर्ताओ की भी जांच होनी चाहिए… शिवा साहू केस के जांच में पता चलेगा कौन 420 है और कौन बेगुनाह
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    शिवा साहू केस में न्याय के लिए शिकायतकर्ताओ की भी जांच होनी चाहिए… शिवा साहू केस के जांच में पता चलेगा कौन 420 है और कौन बेगुनाह

    जितेंद्र हथेलBy जितेंद्र हथेल2024-04-06No Comments0 Views
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    रिपोर्टर पद्मिनी श्रीवास (सारंगढ़)

    सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला बने हुए हैं जितने साल नहीं हुए, उतने कारनामों ने राज्य में अपनी पहचान दिला दी। यह भी सच है की घटनाएं ऐसी घटती है और जिले का नाम सुर्खियों में आने लगा। अभी ताजा मामला शिवा साहू के नाम पर चल रहा है। शिवा साहू ने लोगों का पैसा लिया लेकिन कोई एक भी गरीब दीनदुखी, किसान उसके खिलाफ में थाना में कोई शिकायत नहीं किया और ना ही किसी तहसील कलेक्ट्रेट या कोर्ट में। सरसीवा क्षेत्र के लोगों के जुबान में जो है वह यह है कि शिवा साहू ने जिसके भी पैसे लिए उसको बकायदा तारीख वाइज उनकी उधारी को चुकाया है। रहा सवाल, उधारी लेने का तरीका, लोग कहते हैं कि वह किसी भी व्यापारी या व्यापारी वर्ग को लाभ नहीं देना चाहता और इसलिए वह अपने सिद्धांत अनुसार किसी व्यापारी से पैसा नही लिया। लेकिन अब यह ताजा मामला जो आया है, इसमें जो लोगों का नाम दिया जा रहा है सौरभ अग्रवाल, तरुण साहू, दीपक अग्रवाल, कमल प्रधान।
    आप सब जानते हैं की सौरभ अग्रवाल ने एफआईआर दर्ज किया है। सौरभ अग्रवाल रिपोर्ट में कहता है की 82 लाख रुपए मैंने अपने घर रिश्तेदार लोगों से लिए, तो पुलिस की जांच का विषय यह है कि 82 लाख रुपए सौरभ ने किन-किन लोगों से लिया ? सौरभ अग्रवाल के खाते में कितने पैसे थे ? क्या यह पैसे उनके खुद के थे या किसी अन्य गैर कानूनी तरीके से जमा किए? सौरभ अग्रवाल कहता है कि मैं ट्रांसपोर्टर हूं तो उसके ट्रांसपोर्टर की सभी दस्तावेज और सभी लेनदेन की जांच होनी चाहिए।

    दूसरा व्यक्ति, दीपक अग्रवाल जो गल्ला किराना का व्यापारी है उसके पास 32 लाख रुपए कहां से आए ? उस पैसे का हिसाब किताब क्या है ? इसका भी हिसाब होना चाहिए।
    तीसरा व्यक्ति, तरुण साहू जो ठेकेदार है, तो ठेकेदारी में उन्होंने अब तक कितना पैसा अर्जित किया ? 26 लाख रुपए उनके पास कहां से आया ? 26 लाख रुपए का, हिसाब पुलिस को लेनी चाहिए।
    अब चौथा व्यक्ति कमल प्रधान, जो प्राइवेट कंपनी में काम करता है, तो उसके पास कहां से इतना पैसा आया, उसके भी वेतन, दैनिक वार्षिक खर्च के बाद बैंक डिटेल की जांच होनी चाहिए।
    पांचवा व्यक्ति विश्वजीत खांडेकर, जिसने 20 लाख रुपए, उसके 20 लाख रुपए के हिसाब तो होनी चाहिए, कहां से इतनी राशि अर्जित किया?
    इन सभी चेहरों का बैंक डिटेल की जांच होनी चाहिए और इन्होंने जिनके माध्यम से पैसा दिया उसकी गवाही वीडियो रिकॉर्डिंग या ऐसा कुछ साक्ष्य होना चाहिए जिससे यह प्रूफ हो जाए कि उन्होंने इतने रुपए इस व्यक्ति को इस स्थान पर दिए, वरना कोई भी कह सकता है कि मैं रितिक रोशन को 5 करोड़ दिया, यदि रितिक रोशन या जॉन अब्राहम को यह लोग फंसा दे और पुलिस रितिक रोशन और जॉन अब्राहम के बैंक बैलेंस पर होल्ड लगा दे और प्रशासन उनके वाहन को चिट फंड नियम अधिनियम के तहत कुर्की रख ले तो क्या पुलिस की ड्यूटी नही बनती कि शिकायतकर्ता का ही जांच की जाए। भारत की नागरिकता और स्वतंत्रता, उसके मौलिक कर्तव्य, दायित्व आदि की रक्षा होनी चाहिए। किसी भी आरोप लगा देने से कोई आरोपी नहीं होता।

    होली के दिन की कहानी का सच
    होली का दिन है और होली खेलते हुए शिवा साहू ने अपने पिता को, शिकायतकर्ता की ओर इशारा करते हुए कहा कि, ये जुटहा से क्या बात कर रहे हो, यहां से घर चलो उसी समय कोई और आकर शिकायतकर्ता को अपने हाथ में रखे पिस्तौल टाइप का कुछ दिखाकर जान से मारने की धमकी देता है। शिकायतकर्ता ने अपनी रिपोर्ट में कही पर नहीं लिखा है कि जान से मारने की धमकी देने वाला शिवा साहू का साथी या दोस्त है। गौर करने वाली बात है कि माहौल होली का है और होली में सामान्य तौर से खिलौने बनाए जाते हैं बंदूक पिचकारी, और कुछ भी। स्वाभाविक सी है बात है कि होली का दिन है तो खिलौने वाला पिस्तौल पिचकारी हो जिसमें रंग हो।

    वाहनों की कुर्की

    शासन प्रशासन के पास शिकायत आता है तो पुलिस प्रशासन अपना रिपोर्ट जिला प्रशासन को देता है और जिला प्रशासन चिट फंड अधिनियम के तहत जो भी आरोपी के संपत्ति को कुर्की कर लेता है, लेकिन कुर्की करने का आशय यह है कि जब भी आरोप सिद्ध हो जाए तो शिकायतकर्ता को कुर्क की गई सामग्री को नीलामी करके उसकी राशि दी जा सके। यहां पर जांच होगा कि कोई भी वाहन या अन्य की खरीदी बिक्री हुआ है वह विधिवत हुआ है कि नहीं। इसमें किसी प्रकार की कानून का उल्लंघन हुआ हो तो दोषी होगा, उस हिसाब से धारा लगेगी। पुलिस से जांच रिपोर्ट पर निर्भर करता है कि कौन है 420 ठग। (शिकायतकर्ता 420 है या जिसके विरुद्ध शिकायत किया वो)

    क्या है शिवा साहू पर लगा आरोप का क्रिप्टो करेंसी का हकीकत :

    पिछले कुछ सालों में दुनिया भर में क्रिप्टोकरेंसी, जिसे शॉर्ट फॉर्म में क्रिप्टो भी कहा जाता है, का चलन तेजी से बढ़ रहा है। खासकर युवाओं में इसे लेकर एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। युवा तेजी के साथ क्रिप्टो की ओर आकर्षित होते जा रहे हैं।

    दुनिया भर में लोग अलग-अलग क्रिप्टो जैसे बिटकॉइन, एथेरियम, डोजीकॉइन इत्यादि जैसे तमाम तरह की क्रिप्टोकरेंसी के बारे में सुना होगा। लेकिन ज्यादातर लोगों को क्रिप्टो के बारे में कम ज्ञान है। अलग-अलग देशों में इस क्रिप्टो को लेकर अलग-अलग तरह के नियम और कानून बनाए गए हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि भारत में क्रिप्टो को लेकर क्या नियम और कानून है।

    भारत में क्रिप्टो वैध या अवैध?
    भारत में भुगतान माध्यम के रूप में क्रिप्टोकरेंसी को किसी भी केंद्रीय प्राधिकरण द्वारा विनियमित नहीं किया जाता है। क्रिप्टोकरेंसी से निपटने के दौरान विवादों को निपटाने के लिए कोई नियम और कानून या कोई दिशा-निर्देश निर्धारित नहीं हैं। इसलिए, क्रिप्टोकरंसी में ट्रेडिंग निवेशकों के जोखिम पर की जाती है।

    भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास के साथ-साथ देश के वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित विभिन्न सरकारी प्रवक्ताओं द्वारा दिए गए विभिन्न प्रमुख बयानों के आधार पर, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि क्रिप्टोकरेंसी अवैध है, लेकिन भारत में इस पर कोई निश्चित प्रतिबंध नहीं है।

    क्रिप्टो भारत में अनियमित हैं, लेकिन केंद्रीय बजट 2022 के अनुसार, भारत सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी से लाभ पर 30 प्रतिशत टैक्स और स्रोत पर 1 प्रतिशत टैक्स कटौती की घोषणा की थी।

    नियम और कानून
    देश में क्रिप्टो को लेकर कोई भी आधिकारिक तौर पर नियम और कानून नहीं है। वित्त मंत्री ने अपने पिछले बजट में सिर्फ क्रिप्टो पर लगने वाली टैक्स की बात की थी, इसलिए भारत में क्रिप्टो को लेकर और ज्यादा उलझन है। वित्त मंत्री ने जो अपने बजट भाषण में क्रिप्टो को लेकर जो बाते कही थी उनमें:

    क्रिप्टोकरेंसी निवेशकों को अपनी आय के हिस्से के रूप में कैलकुलेटेड प्रॉफिट और लॉस को रिपोर्ट करने की आवश्यकता है।
    डिजिटल संपत्ति के हस्तांतरण से होने वाली कमाई पर 30 प्रतिशत टैक्स लगाया जाएगा, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी, NFTs आदि शामिल हैं। आभासी संपत्तियों के हस्तांतरण से कमाई की रिपोर्ट करते समय केवल अधिग्रहण की लागत और कोई कटौती की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    खरीदार के भुगतान पर टैक्स डिडक्शन एट सोर्स (टीडीएस) की 1 प्रतिशत कटौती है अगर यह सीमा पार कर जाती है।
    यदि क्रिप्टोकरेंसी को उपहार के रूप में प्राप्त किया जाता है या स्थानांतरित किया जाता है तो यह गिफ्ट के अंत में टैक्स के अधीन होगा।
    यदि आपको वर्चुअल एसेट इन्वेस्टमेंट से कोई नुकसान होता है, तो इसे अन्य आय के साथ संतुलित नहीं किया जा सकता है।

    क्या भारत में बैन हो जाएगी क्रिप्टोकरेंसी?

    हाल ही में भारत सरकार ने क्रिप्टो ट्रेडिंग से संबंधित कुछ प्रक्रियाओं को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत डाल दिया था। वैसे भी FTX के पतन के बाद पूरी दुनिया में सरकारें क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलेट करने वाले एक्सचेंज पर सख्त निगरानी रखने लगी हैं।

    क्रिप्टो की रुलिंग के लिए आरबीआई का कदम
    पिछले साल दिसंबर महीने में भारतीय रिजर्व बैंक ने देश की पहली डिजिटल करेंसी ई-रुपी (e-RUPI) को लॉन्च किया था। डिजिटल रुपया या eINR या E-Rupee भारतीय रुपये का एक सांकेतिक डिजिटल संस्करण है, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा के रूप में जारी किया जाता है।

    e-RUPI के आधिकारीक वेबसाइट के मुताबिक देश में 8 बैंक भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक, ऐक्सिस बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक, इंडसइंड बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में e-RUPI लाइव है।

    क्रिप्टोकरेंसी बिल
    क्रिप्टोकरेंसी बिल 2021, एक विधायी पहल है, जिसे भारत में क्रिप्टोकरंसी के संपन्न बाजार को विनियमित करने के लिए सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किया गया था। यह बिल अभी भी लंबित है और फिलहाल परामर्श के लिए खुला है, जिसकी वजह से बिल को पास होने में अभी कुछ और समय लग सकता है।

    देश में क्रिप्टो को लेकर भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2022 में आभासी संपत्ति पर कराधान पेश किया था। इसे क्रिप्टो पर नकेल कसने की ओर पहला कदम बताया जा रहा है। भारत में वज़ीरएक्स (WazirX), कॉइनडीसीएक्स (CoinDCX), ज़ेबपे (Zebpay), इत्यादि जैसे प्लेटफॉर्म से इस करेंसी में ट्रेडिंग होती है।

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    जितेंद्र हथेल

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